
श्रावण मास की पूर्णिमा आते ही घर-आंगन में एक अलग ही उत्साह दिखाई देने लगता है। बहनों के हाथों में रंग-बिरंगी राखियां, भाइयों के चेहरे पर अपनापन और घरों में पकवानों की खुशबू—यही तो है रक्षाबंधन का असली रंग। लेकिन राखी केवल भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला एक धागा नहीं है। यह प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और जीवनभर साथ निभाने के उस वचन का प्रतीक है, जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं।
उत्तराखंड के पहाड़ों में इस पर्व की अपनी अलग ही आत्मीयता रही है। दूर-दराज गांवों से लेकर शहरों में बसे पहाड़ी परिवारों तक, राखी का त्योहार रिश्तों को फिर से करीब लाने का अवसर बनता है। पहाड़ की बेटी चाहे कितनी ही दूर अपने मायके से चली जाए, लेकिन रक्षाबंधन के दिन उसका मन बचपन के उसी आंगन में लौट जाता है, जहां भाई के साथ खेलते हुए उसने जीवन के सबसे सुंदर दिन बिताए थे।
पहाड़ की बेटियों के लिए मायका और राखी का रिश्ता
उत्तराखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में बेटी का मायके से रिश्ता बेहद भावनात्मक रहा है। विवाह के बाद भले ही उसका घर बदल जाता है, लेकिन मायके की देहरी, मां की ममता और भाई का स्नेह उसके जीवन का अभिन्न हिस्सा बने रहते हैं।
रक्षाबंधन उसी रिश्ते को हर वर्ष एक नई ऊर्जा देता है। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो वह केवल उसकी सुरक्षा की कामना नहीं करती, बल्कि उसके सुख, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना भी करती है। बदले में भाई का वचन भी केवल बहन की रक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। आज के समय में भाई का सबसे बड़ा दायित्व है कि वह अपनी बहन के सम्मान, स्वतंत्रता, सपनों और हर निर्णय में उसके साथ खड़ा रहे।
बदलते समय में बदलता रक्षाबंधन का अर्थ
समय बदल रहा है और रिश्तों की अभिव्यक्ति के तरीके भी बदल रहे हैं। आज बहनें केवल सुरक्षा पाने वाली नहीं हैं, बल्कि स्वयं अपने परिवार और समाज की मजबूत ताकत हैं। सेना से लेकर विज्ञान, शिक्षा, राजनीति, खेल और सामाजिक सेवा तक बेटियां हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं।
इसलिए रक्षाबंधन का अर्थ भी अब और व्यापक होना चाहिए। यह केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा का पर्व नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प है। भाई बहन के लिए खड़ा हो और बहन भाई के जीवन में उसकी सबसे मजबूत मित्र और शुभचिंतक बने—यही इस रिश्ते की खूबसूरती है।
दूरियां बढ़ीं, लेकिन राखी का धागा नहीं टूटा
पहाड़ों से पलायन के बाद आज अनेक परिवार देश और दुनिया के अलग-अलग शहरों में बस गए हैं। कोई दिल्ली में है, कोई मुंबई में, कोई विदेश में और कोई अपने गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर नौकरी कर रहा है। कई बार रक्षाबंधन पर भाई-बहन एक-दूसरे के पास नहीं पहुंच पाते।
लेकिन राखी की खासियत यही है कि यह दूरी को भी छोटा कर देती है। डाक से भेजी गई राखी हो, वीडियो कॉल पर साझा की गई मुस्कान हो या बचपन की यादों में डूबा एक छोटा-सा संदेश—रिश्ते अपनी जगह हमेशा जीवित रहते हैं। आखिर राखी कलाई पर बंधे धागे से ज्यादा दिलों में बसा विश्वास है।
प्रकृति और रिश्तों की रक्षा का भी संकल्प
उत्तराखंड की धरती हमें प्रकृति के साथ जीना सिखाती है। यहां की नदियां, जंगल, पहाड़ और देवभूमि की संस्कृति हमारे जीवन का आधार हैं। ऐसे में रक्षाबंधन का संदेश केवल परिवार तक सीमित न रहे, बल्कि हम अपनी धरती और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी लें।
जिस तरह एक बहन राखी बांधकर भाई से रक्षा का वचन लेती है, उसी तरह हमें भी अपनी नदियों, जंगलों, पहाड़ों और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। प्रकृति सुरक्षित होगी, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित होगा।
रिश्तों को समय देने का पर्व
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारे पास सुविधाएं तो बहुत हैं, लेकिन रिश्तों के लिए समय कम होता जा रहा है। रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी धन-दौलत नहीं, बल्कि अपने लोग हैं।
कभी मां के हाथों की मिठाई, कभी बहन की नाराजगी, कभी भाई की शरारत और कभी बचपन के आंगन की याद—यही वे अनमोल धरोहरें हैं, जिन्हें कोई बाजार नहीं खरीद सकता।
इस रक्षाबंधन पर आइए, केवल राखी बांधने की परंपरा न निभाएं, बल्कि रिश्तों को समय देने का संकल्प भी लें। किसी दूर बैठे भाई या बहन को फोन करें, पुरानी नाराजगी खत्म करें और अपने रिश्तों में फिर से अपनापन भरें।
राखी का संदेश
रक्षाबंधन हमें सिखाता है कि रिश्ते अधिकार से नहीं, प्रेम से मजबूत होते हैं; सुरक्षा केवल ताकत से नहीं, विश्वास से मिलती है; और परिवार केवल एक छत के नीचे रहने वाले लोगों का नाम नहीं, बल्कि सुख-दुख में एक-दूसरे का हाथ थामने का नाम है।
राखी का यह पवित्र धागा हर घर में प्रेम, विश्वास और भाईचारे की खुशबू बिखेरे। पहाड़ की बेटियों की मुस्कान बनी रहे, भाइयों का स्नेह अटूट रहे और हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इन सुंदर रिश्तों की गरिमा को समझें—यही रक्षाबंधन की सच्ची शुभकामना है।
हिंमाल रैबार परिवार की ओर से सभी देशवासियों, विशेषकर उत्तराखंडवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।
**“रिश्तों की डोर मजबूत रहे, प्रेम का दीप जलता रहे,
हर बहन के चेहरे पर मुस्कान रहे और हर भाई का साथ बना रहे।”**
— हिंमाल रैबार
