सीमन जनपद चमोली के चमोली के विकासखंड नंदा नगर के कुरूड  में सात सितम्बर से आरंभ हुवा  हर साल लगने वाले इस मेले से माँ नंदा की छोटी जात  आरंभ  हो जाती है और हर साल माँ की डोली कुरूड से होते हुये रूपकुण्ड तक यात्रा  पर निकलती है और हर बारह  साल मै माँ नंदा की बड़ी जात होती है जिसमे चौ सिंग्या खाडु (चार सिगों  वाला भेड ) नंदा जी की डोली की अगु वाई करता है तब  ये 280 किलो मिटर यात्रा दुनियाँ की सबसे लम्बी पैदल यात्रा  होती है जो कि एक ऐतिहासिक यात्रा है इस मेले मै माँ नन्दा नई अनाज का भोग लगाया जाता है माँ नंदा उत्तराखंड वासियों की आराध्य देवी है मान्यता है कि इस दौरान माँ नंदा अपने ससुराल कैलाश के लिए विदा  होती है इस भावुक क्षण के गवाह बनने के लिए समूचे उत्तराखण्ड  और उत्तराखंड के बाहर से भी लोग आते हैँ माँ नंदा के इस मेले में शिरकत करते हैं इस दौरान हजारों की संख्या में लोग कुरूड  गांव पहुंचकर मां नंदा के दर्शन कर  आशीर्वाद लेते  है इस वर्ष 7 सितंबर से माँ नंदा का 3 दिन का मेला कुरूड  में आरंभ हुआ था जिसमें मां नंदा को कैलाश विदा करने के लिए हजारों की संख्या में माताएं और बहनों ने आकर माँ नंदा का दर्शन कर और आशीर्वाद लेकर मां नंदा को नए अन्न का भोग लगाकर अपना माँ से अपने सुखद भविष्य का आशीर्वाद लिया माँ  नंदा की डोली कुरुंड से होकर नंदा नगर के गाँवों का भ्रमण कर थराली विकास खण्ड के गाँवों से होते हुये देवाल  विकास खण्ड के  लोहा जंग के रास्ते रूप कुंड पहुंचेंगी जहां अष्टमी के दिन माँ नंदा कैलाश के लिए रूप कुंड से विदा होगी माँ  नंदा को विदा करने के बाद उनके साथ गए हुए सभी लोग डोलियों के साथ वापस आएंगे और एक देव डोली  की छह माह के लिए बधाण के देवराडा मै पूजा की जाएगी और 6 माह होने के पश्चात फिर से डोली को वापस कुरूड मंदिर में लाया जाएगा जहां दोनों देवड़ोलियों की पूजा कुरूड में वहां के पुजारी गॉड ब्राह्मणों द्वारा  पूजा की जाएगी । 

नंदा की कैलाश विदाई के वक्त हंस फाउण्डेशन ने लगाया विशाल भंडारा।

नंदा देवी मेले में जहां लोगों की भारी भीड़ मौजूद रही वहीं हंस फाउंडेशन की तरफ से नंदा देवी मेले में तीन दिन तक 24 घंटे भंडारे का आयोजन किया गया जिसके तहत स्थानीय युवाओं ने भी बढ़ चढकर भंडारे में सहयोग किया जिसमें लक्ष्मण सिंह राणा देव सिंह नेगी सुखबीर रौतेला मनोज  कठैत एवं प्रकाश मंदोली नंदन सिंह रावत  सहित सैकड़ो युवाओं ने इस भंडारे में अपना योगदान दिया भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर वहां आए हुए श्रद्धालुओं और माता बहनों ने भंडारे की खूब तारिफ की।।।। 

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