दो साल बाद मणिपुर में प्रधानमंत्री का कदम

दो वर्ष पहले जातीय हिंसा से झुलसा यह राज्य आज विकास की सौगातों से सराबोर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुराचांदपुर से 12,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन कर एक संदेश दिया—“मणिपुर अब टूटे सपनों से निकलकर नई उड़ान भरने को तैयार है।”

सड़कें, आईटी और बाढ़ प्रबंधन – विकास का नया खाका

प्रधानमंत्री ने जिन योजनाओं का शिलान्यास किया, वे मणिपुर की बुनियादी समस्याओं को सीधे संबोधित करती हैं।

3,600 करोड़ की मणिपुर अर्बन रोड्स प्रोजेक्ट – शहरों को नई राह और गति देने वाली योजना।

500 करोड़ की इंफोटेक डेवलपमेंट परियोजना – डिजिटल भारत की रोशनी अब मणिपुर के कोने-कोने तक।

दिल्ली और कोलकाता में मणिपुर भवन – बेटियों और युवाओं के लिए किफायती व सुरक्षित आवास।

बाढ़ प्रबंधन योजनाएं – हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ को रोकने की तैयारी।

प्रधानमंत्री ने 3,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देकर इस संदेश को और मजबूत किया कि “जहां मोदी जाते हैं, विकास की गंगा बहती है।”

“मां भारती के मुकुट का रत्न”

मोदी ने मणिपुर की तुलना भारत के मुकुट में जड़े रत्न से की।

“मणिपुर मां भारती के मुकुट का रत्न है। हमें इसे शांति और विकास की राह पर निरंतर आगे ले जाना है।”

उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उद्धृत करते हुए याद दिलाया कि मणिपुर को कभी भारत की आज़ादी का द्वार कहा गया था। अब यही द्वार भारत की समृद्धि और एकता का प्रवेशद्वार बनेगा।

रेल – सपनों को पंख

मणिपुर और मिजोरम की नई रेल कनेक्टिविटी इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण रही।

मणिपुर को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू।

मिजोरम की राजधानी को बैराबी-सैरांग रेल लाइन से जोड़ा गया। 8,070 करोड़ की इस परियोजना में 45 सुरंगें और 143 पुल (55 बड़े, 88 छोटे) बने—इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण।

यह केवल रेल लाइन नहीं, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक है कि पूर्वोत्तर अब हाशिये पर नहीं रहेगा।

शांति और सद्भाव का पैगाम

राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने जनता से शांति और सद्भाव की अपील की।

 “हमने मुश्किल वक्त देखा है, लेकिन अब विकास और स्थायी शांति की ओर बढ़ने का समय है।”

विस्थापितों का पुनर्वास और आपसी विश्वास की बहाली ही मणिपुर की असली परीक्षा है।

जनता का उत्साह बनाम विपक्ष का विरोध

बारिश और जलभराव के बावजूद कांगला किले में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। मोदी का रोड शो लाखों लोगों के उत्सव में बदल गया। वहीं, कांग्रेस ने निकटस्थ प्रदर्शन कर विरोध जताया, मगर जनसैलाब ने साबित कर दिया कि विकास की भाषा जनता की सबसे प्रिय भाषा है।

उत्तराखंड से मणिपुर – संवेदना का सेतु

प्रधानमंत्री की यह पहचान है कि वे केवल योजनाएं नहीं बांटते, बल्कि संवेदनाओं को भी छूते हैं। हाल ही में वे उत्तराखंड को बाढ़-भूस्खलन से राहत दिलाने के लिए 12 अरब रुपये का पैकेज दे आए थे। अब मणिपुर में वे विकास की गंगा बहा गए। यही उनकी राजनीति का असली जादू है—लोगों को यह अहसास दिलाना कि दिल्ली से उनकी आवाज सुनी जा रही है। 

आज मणिपुर के सामने दो रास्ते हैं। एक ओर हिंसा और विभाजन की छाया है, दूसरी ओर शांति और विकास का उजाला। प्रधानमंत्री का दौरा दिशा दिखाता है, लेकिन असली जिम्मेदारी मणिपुर की राजनीति और समाज की है।

याद रखिए—सड़कें और पुल केवल भौतिक विकास हैं, असली विकास तब होगा जब दिलों को जोड़ने वाले पुल भी बनेंगे।

मणिपुर के लिए यह अवसर निर्णायक है। अगर आज विकास और शांति की इस लहर को थाम लिया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इसे स्वर्णिम मोड़ के रूप में याद करेंगी। वरना इतिहास गवाह है, अवसर हाथ से फिसलते देर नहीं लगती।

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