“जहाँ गूंजते थे भजन, वहाँ अब गूंजती है गड़गड़ाहट, जहाँ बहती थी शांति, वहाँ अब बह रहा है भय का सन्नाटा। हिमालय की गोद में […]
एक पुकार, एक संदेश
“जहाँ गूंजते थे भजन, वहाँ अब गूंजती है गड़गड़ाहट, जहाँ बहती थी शांति, वहाँ अब बह रहा है भय का सन्नाटा। हिमालय की गोद में […]