
सुपताल झलताल ( झिल) एक रमणीक पर्यटक स्थल है जहां हर साल कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर एक भब्य मेले का आयोजन होता है जिसमें चमोली जिले की चार विकासखंड नंदा नगर देवाल थराली नारायण बगड के लोग शिरकत करते हैं जहां श्री कृष्ण जन्माष्टमी एक बहुत बड़ा त्यौहार है वही हर साल कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर सुपताल झलताल में इस मेले को मोली जिले के चार विकास खंडों के लोगों का एक साथ मेले में सहभागिता कर मेले को उसके अंजाम तक पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना अपने मै एक सुखद अनुभव के साथ हि भाई चारे की मिसाल भी है वही सुपताल झलताल अपनी नैसर्गिक सौंदर्यता के लिए प्रसिद्ध है यहां पर प्रतिवर्ष देश ही नहीं वरन विदेशों के सैलानी भी कैंपिंग करने आते हैं यह वही स्थान है जहां आजादी से पहले तत्ककालीन कमिश्ननर लौर्ड कर्जन नाम से गुजरने वाली लौर्ड कर्जन रोड का एक पड़ाव है जो उच्च हिमालयी क्षेत्र को पार करते हुए गढ़वाल और कुमाऊँ को जोड़ने का काम करती है तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड कर्जन ने एक योजना बनाई क्यों ना एक ऐसे मार्ग का विकास किया जाए जिस मार्ग के सहारे भारत के प्रथम बॉर्डर मलारी से होते हुए सीमांत विकास खण्ड जोशीमठ के तपोवन से होते हुए दसोली विकास खण्ड के पांणा ईराणी होते हुए घाट विकास खण्ड रामणी के रास्ते होते हुए बीचों-बीच भेटी बंगाली की पहाड़ियों को चीरते हुए लोग थराली विकासखंड होते हुए ग्वालदम से गुजर कर बागेश्वर के रास्ते को टच करते हुए हल्द्वानी पहुंचैं जहां से लोगों को अपनी जरूरी सामान लाने में आसानी होग क्योंकि उस वक्त गाड़ी मोटर का जमाना नहीं था इसलिए लॉर्ड कर्जन रोड होते हुए लोग सुपताल झलताल के रास्ते होते हुए हल्द्वानी पहुंचकर और वहाँ से सामान लेकर वापस आते थे। अब बस ये मात्र पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं और साथ ही लोगों को उच्च हिमालय क्षेत्र में घूमने का जो शौक है वह यहां पर आकर पूरा हो सकता है शुभ लाल चला अपने में एक आकर्षण का केंद्र है जिससे पर्यटक यहां आकर खुद को आनंदित महसूस करते है यहां पहुंचने के लिए पर्यटकों को नंदप्रयाग से 19 किलोमीटर नंदा नगर और नंदा नगर से 5 किलोमीटर बाँजबगड़ होते हुए आगे की दूरी 7 किलोमीटर बंगाली तक पहुंचा जा सकता है जहां से डोल के सुंदर बुग्यालों से होते हुए मात्र 5 किलोमीटर पैदल चलकर सुपताल और झलताल पहुंचा जा सकता है जहां पर कैंपिंग के जरिए उच्च हिमालयी क्षेत्रो का आनंद लिया जा सकता है और गर्मियों में यहां की मखमली घास मै बैठ ने और कैम्पिग का एहसास हि अलग है ।
