
जब दुनिया दिखावे की चकाचौंध में उलझी हो, और शादियों को सामाजिक स्टेटस प्रदर्शित करने का माध्यम समझा जाने लगे, तब कोई एक ऐसा भी होता है जो सादगी की राह पर चलकर समाज को आइना दिखा देता है। उत्तराखंड के चमोली ज़िले के जिलाधिकारी संदीप तिवारी और डॉक्टर पूजा डालाकोटी का विवाह ऐसा ही एक प्रेरणादायी उदाहरण है—जहाँ ना बैंड-बाजा था, ना बारात की भीड़ और ना ही भव्य समारोहों का हो-हल्ला। थी तो सिर्फ सादगी, श्रद्धा और आत्मीयता।
मंदिर की पवित्रता में बसी विवाह की गरिमा
28 अप्रैल 2025 को संदीप तिवारी और डॉक्टर पूजा डालाकोटी ने कोर्ट मैरिज की। इसके बाद यह नवदंपति गोपेश्वर के प्रसिद्ध गोपीनाथ मंदिर पहुँचा, जहाँ उन्होंने भगवान के चरणों में नमन कर अपने नए जीवन की शुरुआत का आशीर्वाद लिया। यह क्षण केवल उनका निजी नहीं था, बल्कि समाज को यह सिखाने वाला था कि विवाह संस्कार दिखावे का मंच नहीं, बल्कि दो आत्माओं और परिवारों के पवित्र मिलन की भावना है।

हिमाचली परंपरा की प्रेरणा और उत्तराखंडी संस्कार
संदीप तिवारी मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले से हैं और पूजा डालाकोटी उत्तराखंड के हल्द्वानी की निवासी हैं। संदीप ने स्वयं बताया कि वह हिमाचल की पारंपरिक और सादगीपूर्ण विवाह संस्कृति से प्रेरित थे। उन्होंने पूजा से इस विषय में बातचीत की और दोनों ने एकमत होकर निर्णय लिया कि विवाह न केवल सरल होना चाहिए, बल्कि श्रद्धा से परिपूर्ण भी। यह विचार सिर्फ उन दोनों का नहीं था, बल्कि उनके परिवारों का भी समर्थन प्राप्त था।
समाज को एक सकारात्मक संदेश
ऐसे दौर में जब विवाह आयोजन करोड़ों के खर्च और भव्यता के प्रदर्शन बन चुके हैं, वहाँ एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और एक सरकारी मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर द्वारा इस तरह सादगी से विवाह करना एक साहसी और अनुकरणीय कदम है। यह संदेश देता है कि सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान दिखावे से नहीं, चरित्र और संस्कारों से बनता है।
कौन हैं संदीप तिवारी और पूजा डालाकोटी?
संदीप तिवारी 2017 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं। उन्होंने उत्तराखंड में बतौर एसडीएम, मुख्य विकास अधिकारी नैनीताल, और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वह चमोली जिले के जिलाधिकारी हैं और 7 सितंबर 2024 से इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।
डॉ. पूजा डालाकोटी हल्द्वानी के सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ईएनटी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पिता सेंचुरी पेपर में सेवा दे चुके हैं और अब वीआरएस ले चुके हैं।

एक नई राह की ओर
इस विवाह से स्पष्ट है कि जब सोच में पारदर्शिता हो, जब रिश्तों में आत्मीयता हो, और जब परंपराओं का सम्मान हो, तो विवाह एक भव्य प्रदर्शन नहीं बल्कि जीवन का पवित्र संकल्प बन जाता है। डीएम संदीप तिवारी और डॉक्टर पूजा डालाकोटी ने यह सिद्ध किया है कि बदलाव का रास्ता खुद पर अमल करने से शुरू होता है।
इनकी यह सादगी और मूल्य आधारित सोच केवल एक खबर नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है। ऐसे ही निर्णयों से समाज में परिवर्तन आता है—धीमा, मगर गहरा।
“सच्चा वैभव वह नहीं जो दिखे, सच्चा वैभव वह है जो जिए।”
डीएम संदीप तिवारी और डॉक्टर पूजा डालाकोटी का यह विवाह आने वाली पीढ़ियों को यही सिखाएगा।
