जब किसी गाँव की पगडंडियों पर एक बार फिर जीवन की आहट सुनाई देने लगे, जब सूने आँगनों में बच्चों की हँसी गूंजने लगे, और […]
बीकेटीसी का 18 सदस्यीय अग्रिम दल श्री केदारनाथ धाम पहूँचा
आज श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी )मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल के निर्देश पर 18 सदस्यीय अग्रिम दल आज शुक्रवार को सहायक अभियंता/ […]
श्री हेमकुंड साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ और विश्व का सबसे ऊँचा गुरुद्वारा.
उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में स्थित श्री हेमकुंड साहिब, समुद्र तल से लगभग 15,250 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और इसे दुनियाँ का सबसे […]
उत्तराखण्ड का देव पुष्प ब्रहम कमल संस्कृति का संवाहक हि नहीं अपितु आस्था का प्रतीक भी है l
हिमालय की गोद में बसा उत्तराखण्ड ना केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी संस्कृति, परंपराएँ और देव आस्था भी अद्वितीय हैं। इन्हीं […]
रुद्रप्रयाग का जाख देवता मेला- यक्ष प्रश्न और धधकते अंगारों पर नृत्य की रहस्यमयी परंपरा.
उत्तराखंड की देवभूमि, जहां हर पर्व और परंपरा में आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम होता है, वहीं गुप्तकाशी के पास स्थित जाख देवता का […]
धार्मिक आस्था, व सांस्कृतिक समृद्धि और विकास की धरोहर है चमोली जिले के कर्णप्रयाग का बैसाखी मेला
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित कर्णप्रयाग नगर धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण नगर है। अलकनंदा और पिंडर नदियों के संगम […]
जौनसार का प्रमुख पर्व: विसु — परंपरा, पहचान और भावनाओं का संगम।
उत्तराखंड की देवभूमि में बसा जौनसार-बावर, न केवल अपने भौगोलिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां की लोकसंस्कृति भी इसकी आत्मा है। इसी […]
श्री बदरीनाथ धाम यात्रा कपाटोत्सव कार्यक्रम
गाडू घड़ा तेलकलश यात्रा 22 अप्रैल को राजदरबार नरेंद्र नगर से शुरू होगी। • आदिगुरु शंकराचार्य गद्दी, श्री उद्धव जी, श्री कुबेर जी, रावल जी […]
बगड़वाल नृत्य: आस्था, प्रेम और लोक संस्कृति का जीवंत पर्व
चमोली जिले के विकासखंड घाट के आला गांव में हर वर्ष वसंत ऋतु के अंत में आयोजित होने वाला बगड़वाल नृत्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय लोककथाओं, प्राकृतिक […]
उत्तराखण्ड में पलायन: एक ज्वलंत और स्थायी संकट
उत्तराखण्ड—हिमालय की गोद में बसा एक नवयुवक राज्य है जिसकी स्थापना 9 नवम्बर 2000 को जनता के लंबे संघर्षों और सपनों के फलस्वरूप हुई थी। […]
