
जब पर्वतों पर बर्फ की मोटी चादर बिछी हो, हवा में शून्य से नीचे तापमान की सिहरन हो और हर ओर केवल सफेद सन्नाटा पसरा हो, तब भी यदि कोई दल निस्वार्थ भाव से सेवा में जुटा हो, तो वह है हमारी भारतीय सेना। आगामी
25 मई 2025 से प्रारंभ होने वाली श्री हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय सेना के जवान इन दिनों दिन-रात कड़ी मेहनत करने मै जुटे हैं।
हाल ही में ली गई तस्वीरें इस समर्पण की गवाही दे रही हैं। सेना के जवान ऊंचे बर्फीले पर्वतीय क्षेत्रों में फावड़ों से रास्ता साफ करते हुए नजर आते हैं – न थकान की शिकायत, न ठंड की परवाह। उनका उद्देश्य सिर्फ एक – तीर्थयात्रियों को सुरक्षित, सहज और श्रद्धाभाव से अपने आराध्य तक पहुंचाने के लिए मार्ग बनाना।
यह सेवा केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि उन मूल्यों का प्रतिबिंब है, जो भारतीय सेना को असाधारण बनाते हैं – अनुशासन, परिश्रम, और देशभक्ति। इन कठिन परिस्थितियों में काम करना केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन हमारे जवान हर बार इन चुनौतियों को मात देते हैं।
जहाँ कश्मीर में हाल ही में हुए पर्यटकों पर हमले ने देश को दुख की लहर में डुबो दिया है। वहीं ऐसे समय में हेमकुंड साहिब जैसे स्थलों की यात्रा हमारी आस्था का पुनर्संवर्धन करती है। और इस आस्था की रक्षा में, हमारी सेना चट्टान बन कर खड़ी रहती है – हर मौसम, हर परिस्थिति में।
सेना के साथ-साथ श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के सेवादार भी इस कार्य में कंधे से कंधा मिलाकर जुटे हुए हैं। वे रास्तों को खोलने, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सेवाएं तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगे रहते हैं। यह सामूहिक प्रयास हमें यह भी सिखाता है कि सेवा और सहयोग जब मिलते हैं, तब असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
श्री हेमकुंड साहिब की यह यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि भारतीय सेना की सेवा भावना का एक जीवंत उदाहरण भी है। हर बार जब कोई श्रद्धालु इस यात्रा को पूर्ण करता है, तो उसमें कहीं न कहीं हमारे सैनिकों के संघर्ष, त्याग और प्रेम की छाया होती है।
इसलिए, जब भी आप इस पवित्र यात्रा पर जाएं, तो हिमालय की ऊंचाइयों पर नज़र डालकर उन सैनिकों को याद करें, जो हमारी आस्था की राहों को अपने परिश्रम से प्रशस्त करते हैं।




