उत्तराखंड के चमोली जिले के एक छोटे से गांव चिरखून से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में 137वीं रैंक प्राप्त करना, कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। यह कहानी है अंकिता कांति की, जिन्होंने सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और अनेक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को सच कर दिखाया।

अंकिता का बचपन अभावों में बीता, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं थी। तुंतोवाला के ‘दून मॉडर्न स्कूल’ से हाई स्कूल में 92.40% अंक प्राप्त कर उन्होंने प्रदेश में 22वां स्थान हासिल किया। ट्यूशन पढ़ने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना, सर्दियों की कठोर ठंड में भी पढ़ाई का जज्बा बनाए रखना – ये उनके संघर्ष के प्रतीक हैं।

हाईस्कूल के बाद अंकिता ने 2018 में संजय पब्लिक स्कूल, करबारी से इंटरमीडिएट की परीक्षा में 96.4% अंक प्राप्त कर देहरादून में टॉप किया और प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया। इसके बाद डीबीएस कॉलेज से बीएससी और डीएवी कॉलेज से एमएससी (भौतिक विज्ञान) की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के इन वर्षों में ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का मजबूत संकल्प लिया।

उनके पिता देवेश्वर कांति एक बैंकिंग कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड हैं, और माता ऊषा कांति एक गृहणी हैं। सीमित आर्थिक साधनों में भी परिवार ने बेटियों के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया। अंकिता की छोटी बहन अंजलि बैंक में कार्यरत हैं और सबसे छोटी बहन अनुष्का भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं।

अंकिता कहती हैं,
“मैंने 11वीं कक्षा में ही तय कर लिया था कि मुझे यूपीएससी पास करनी है। यह सिर्फ मेरा सपना नहीं था, यह मेरे गाँव, मेरे संघर्ष और उन बच्चों का सपना था जो कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानते।”

आज जब अंकिता की उपलब्धि से पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है, उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है जो सीमाओं के बीच भी सपने देखना और उन्हें पूरा करना नहीं छोड़ते।

अंकिता का संदेश साफ है:
संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा हो, संकल्प उससे बड़ा होना चाहिए

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