
“जय बदरीविशाल” के उदघोष, गढ़वाल स्काउट रेजीमेंट के भक्ति संगीत, पुष्पवर्षा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आज प्रातः 6 बजे विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। बैशाख शुक्ल सप्तमी, पुष्य नक्षत्र के इस पावन अवसर पर 15,000 से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने धाम परिसर को एक भक्ति एवं आस्था के महासागर में परिवर्तित कर दिया।
मंदिर को इस अवसर पर 40 क्विंटल से अधिक फूलों से सजाया गया था। सीमांत गांव माणा और बामणी की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य व भजन प्रस्तुत कर इस अवसर को और भी भावपूर्ण बना दिया। भारतीय सेना, आईटीबीपी और दानी श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे आयोजित किए गए। गगन से हेलीकॉप्टर के माध्यम से फूलों की वर्षा ने इस अद्भुत धार्मिक आयोजन को स्वर्गीय रूप प्रदान किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपाट उद्घाटन अवसर पर चारधाम यात्रा हेतु तीर्थयात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें उत्तराखंड आने का आमंत्रण दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार द्वारा तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। इस वर्ष की यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश और देश की समृद्धि एवं सुख-शांति की प्रार्थना की।

धार्मिक परंपराओं का पालन
कपाट खुलने की प्रक्रिया रविवार तड़के 4 बजे शुरू हुई जब बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, मंदिर अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य कर्मचारी मंदिर परिसर पहुंचे। 4:30 बजे श्री कुबेर जी की प्रतीक प्रतिमा बामणी गांव से दक्षिण द्वार से मंदिर में प्रवेश कराई गई। 5 बजे रावल अमरनाथ नंबूदरी, पूर्व रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारीगण, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिलाधिकारी संदीप तिवारी समेत अन्य विशिष्टजनों ने मंदिर परिसर में प्रवेश किया।
5:30 बजे द्वार पूजा शुरू हुई और 6 बजे कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इससे पूर्व माता लक्ष्मी ने अपने मंदिर में प्रवेश किया और श्री उद्धव जी, श्री कुबेर जी, श्री गरुड़ जी गर्भगृह में विराजमान हुए। इसके बाद भगवान बदरीविशाल को घृत कम्बल से मुक्त कर निर्वाण दर्शन कराए गए। 10 बजे से महाभिषेक पूजा शुरू हो जाएगी की, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर बीकेटीसी द्वारा कराई जाएग।
विशिष्टजन एवं प्रशासनिक सहभागिता
इस पावन अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्राता पंकज मोदी, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला, बीकेटीसी के नव नियुक्त अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, उपाध्यक्षगण ऋषि प्रसाद सती और विजय कपरवाण, सचिव हरिश चंद्र सेमवाल, पुलिस अधीक्षक, उपजिलाधिकारी, डिमरी पंचायत के प्रतिनिधि, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, सेना, मंदिर समिति के सदस्य एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अन्य मंदिरों के कपाट भी खुले
आज ही बदरीनाथ परिक्रमा स्थित श्री गणेश, घंटाकर्ण, आदि केदारेश्वर, शंकराचार्य मंदिर, माता मूर्ति मंदिर (माणा) एवं भविष्य बदरी मंदिर (सुभाई तपोवन) के भी कपाट विधिवत रूप से खोल दिए गए। पुजारियों द्वारा धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न करवाई गई।
चारधाम यात्रा की नई शुरुआत
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा का श्रीगणेश पूर्णता की ओर अग्रसर हो गया है। इससे पूर्व 30 अप्रैल को श्री यमुनोत्री और गंगोत्री तथा 2 मई को श्री केदारनाथ धाम के कपाट खोले जा चुके हैं। पर्यटन मंत्री ने जानकारी दी कि इस वर्ष अब तक करीब 25 लाख तीर्थयात्रियों ने चारधाम यात्रा हेतु रजिस्ट्रेशन करा लिया है।
श्री बदरीनाथ धाम में कपाट उद्घाटन का यह महापर्व आस्था, परंपरा और संगठन का अनुपम उदाहरण बना। उत्तराखंड सरकार और बीकेटीसी के समन्वित प्रयासों से यह आयोजन भव्य और व्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुआ। अब तीर्थयात्रियों के स्वागत और सेवा के लिए यात्रा मार्ग पूरी तरह सजग और समर्पित है।
“जय बदरीविशाल!” – यह उद्घोष एक बार फिर गूंज उठा है हिमालय की पवित्र वादियों में।





