उत्तराखंड की दिव्य और अलौकिक भूमि, देवभूमि केदारनाथ में जब बाबा केदार के कपाट खुलते हैं, तो उनके साथ-साथ एक और महान देवता के दरवाज़े भी श्रद्धा और आस्था से खुलते हैं—वे हैं बाबा भकुंट भैरवनाथ। केदारनाथ के दक्षिण दिशा में विराजमान भैरवनाथ न केवल भगवान शिव के गण हैं, बल्कि स्वयं केदारनाथ क्षेत्र के रक्षक और संरक्षक देवता भी माने जाते हैं।

भकुंट भैरवनाथ की महिमा

भैरव, शिव का ही रौद्र रूप हैं। मान्यता है कि जब श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं और समस्त क्षेत्र बर्फ की चादर से ढक जाता है, तब बाबा भैरवनाथ ही इस पवित्र क्षेत्र की रक्षा करते हैं। भकुंट भैरवनाथ, भैरव के विशेष रूप हैं, जिनकी आराधना विशेष रूप से तीर्थयात्रा काल के प्रारंभ पर की जाती है। इन्हें केदारनाथ का प्रहरी देवता माना जाता है, जो प्राकृतिक आपदाओं, विघ्नों और अघटित घटनाओं से इस भूमि की रक्षा करते हैं।

कपाट उद्घाटन का पावन अवसर

बीते शनिवार दोपहर को, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति तथा केदारनाथ तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में बाबा भकुंट भैरवनाथ के कपाट विधिवत रूप से खोले गए। जैसे ही कपाट खुले, वैदिक मंत्रोच्चारण और शंखध्वनि से पूरा क्षेत्र गूंजायमान हो उठा। तीर्थ पुरोहितों और पुजारियों ने भैरवनाथ जी का विशेष पूजन किया और इस वर्ष की यात्रा निर्विघ्न संपन्न  और जनकल्याण हो इसकी कामना की।

श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था

इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों की आंखों में श्रद्धा के आँसू थे और हाथ जोड़कर  बाबा भैरवनाथ को प्रणाम कर रहे हैं।  श्रद्धालुओं का कहना है  कि “जब हम बाबा केदार के दर्शन करते हैं, तब बाबा भैरवनाथ की पूजा  जरूर करते हैँ क्योंकि वे ही तो हमारी यात्रा के अदृश्य रक्षक हैं । 

धार्मिक मान्यता और लोक आस्था

स्थानीय जनश्रुतियों और लोककथाओं में भैरवनाथ को गाँवों और घाटियों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। विशेषकर भकुंट भैरवनाथ की पूजा इस क्षेत्र के लोगों के लिए आत्मिक बल का स्रोत है। माना जाता है कि जब 2013 की आपदा ने केदारनाथ क्षेत्र को झकझोरा था, तब बाबा भैरवनाथ ने ही मंदिर और तीर्थ क्षेत्र की अदृश्य रक्षा की थी।

भविष्य के लिए संदेश

बाबा भकुंट भैरवनाथ की पूजा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जनमानस की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह पूजन हमें यह सिखाता है कि भौतिक विपत्तियों के बीच भी यदि हमारी श्रद्धा अडिग है, तो ईश्वर की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। आज जब तीर्थ यात्रा पुनः अपने वैभव को प्राप्त कर रही है, तो यह समझना आवश्यक है कि इन सबके पीछे देवताओं की अदृश्य उपस्थिति और लोकआस्था की शक्ति काम करती है।

जय बाबा भकुंट भैरवनाथ!

हर हर महादेव! जय बाबा केदार। 

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