जब एक माँ का लाल खो जाता है, तो पहाड़ की हर चोटी चुप हो जाती है, और हर घाटी पूछती है — मनोज कहाँ गया?”

चमोली की वादियों में आज हर कोई एक ही नाम दोहरा रहा है  मनोज सिंह।

21 साल का यह युवा, गाँव बांशबगड़ (थाना नंदानगर) का निवासी, मेहनती, शांत, अपने परिवार के लिए समर्पित  29 जून 2025 से रहस्यमयी हालातों में लापता है।

 29 जून की रात — वो रात जो सब कुछ बदल गई

मनोज हर रोज़ की तरह गोविंदघाट से घांघरिया होते हुए हेमकुंड साहिब के मार्ग पर घोड़े की सेवा कर रहा था।

उसी शाम स्थानीय घोड़ा मालिक देवेंद्र चौहान से उसका झगड़ा हुआ, मामला पुलिस चौकी तक पहुँचा लेकिन वहीं दबा दिया गया।

इसके बाद मनोज अपने डेरे पर लौटा।

सुबह उठे तो… मनोज गायब था।

 घंटी बजती रही… फिर खामोशी छा गई

मनोज का मोबाइल अगले दिन तक घंटी देता रहा — लेकिन जवाब नहीं आया।

3-4 दिन बाद जब परिजन उसका कोई सुराग नहीं पा सके, तो गाँव के लोग गोविंदघाट पहुँचे।

लेकिन वहां पता चला कि 29 जून के बाद किसी ने मनोज को नहीं देखा।

 पुलिस की चुप्पी — एक और चोट

पुलिस द्वारा तुरंत कार्रवाई न करना,

FIR दर्ज करने में 10 दिनों की देरी,

यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं व्यवस्था की संवेदनशीलता खो गई है।

हालांकि सोशल मीडिया पर अब Chamoli Police द्वारा गुमशुदगी की सूचना साझा की गई है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि —

अगर एक नियम के तहत 24 घंटे में FIR होनी चाहिए थी, तो अब तक क्यों नहीं हुई?

 आज देहरादून में उठी न्याय की आवाज़

11 जुलाई 2025 को देहरादून में निवास कर रहे नंदानगर (चमोली) क्षेत्र के लोगों ने गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री राजीव स्वरूप जी को ज्ञापन सौंपा।

इस पत्र में मनोज की रहस्यमयी गुमशुदगी, घोड़े के मालिक से हुए विवाद और पुलिस की निष्क्रियता का विस्तार से उल्लेख किया गया।

जनता की पीड़ा सुनकर IG राजीव स्वरूप जी ने तत्क्षण पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि गुमशुदगी को गंभीरता से लिया जाए और तत्काल FIR दर्ज की जाए।

उनके आदेश के बाद अब चमोली पुलिस ने गुमशुदगी को सार्वजनिक किया है और खोज अभियान में तेजी लाई है।

अब जरूरी है — न्याय की दिशा में सच्ची कार्रवाई

अब जबकि IG स्तर पर आदेश हो चुके हैं, अब जिम्मेदारी है कि:

देवेंद्र चौहान और अन्य संदेहास्पद लोगों से कड़ी पूछताछ हो।

CCTV फुटेज को खंगाला जाए।

मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, और संभावित चश्मदीदों से पूछताछ हो।

FIR दर्ज कर पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए।

 मनोज सिर्फ एक नाम नहीं — एक संघर्ष की कहानी है

उसकी मेहनत, उसकी चढ़ाई, उसका पसीना —

हेमकुंड साहिब की ऊँचाई पर उसने केवल यात्रियों को नहीं चढ़ाया,

वो अपने परिवार की उम्मीदों को भी साथ ले जाता था।

अब उसकी माँ की आंखों में नींद नहीं, बस सवाल हैं…

 हमारी माँग — अब बस न्याय चाहिए

1. CBI या न्यायिक जांच हो।

2. सभी संदिग्धों की गहन पूछताछ हो।

3. पुलिस की लापरवाही की जवाबदेही तय हो।

4. मनोज के परिवार को लगातार जानकारी दी जाए।

5. जांच को पारदर्शिता के साथ मीडिया व जनता के सामने लाया जाए।

ये सिर्फ मनोज की नहीं, हम सब की कहानी है

अगर आज एक गरीब पहाड़ी लड़का यूँ ही गुम होकर भुला दिया गया,

तो कल न जाने और कितने मनोज ऐसे ही खो जाएंगे।

अब हमें चुप नहीं रहना —

हमें उस माँ की आवाज़ बनना है

जिसका बेटा 29 जून की रात को हमेशा के लिए खामोशी में डूब गया।

बहुत देर कर दी हुज़ूर आते-आते… अब और देर न हो।

हमें मनोज नहीं मिला, पर अब इंसाफ तो मिले।”

📞 सूचना देने हेतु पुलिस संपर्क:

पुलिस अधीक्षक चमोली: 01372-252134

थाना गोविंदघाट: 9720089804

📣 कृपया इस लेख को साझा करें, ताकि ये आवाज़ हर उस दरवाज़े तक पहुँचे जहाँ न्याय की कुर्सी बैठी है।

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