
हिमालय क्षेत्र में ऐसे कई स्वास्थ्य वर्धक वनस्पतियाँ होती हैं जिनका स्थानीय लोग सैकड़ो वर्षों से औषधि के रूप में सेवन करके अपने रोगों को ठीक करते आ रहे हैं ऐसे ही एक वनस्पति है जिससे स्थानीय लोग चंद्रा कहते हैं चंद्रा एक मौसमी वनस्पति है जो बसंत ऋतु के प्रारंभ मै उगनी सुरु होती है और ग्रीष्म ऋतु के आरंभ पर समाप्त हो जाती है अथार्थ इसका जीवनकाल काफी छोटा होता है यह सब्जी फरवरी माह के आरंभ से लेकर अप्रैल माह के मध्य तक रहती (माघ माह के मध्य से लेकर चैत्र माह के अंत तक रहती है ) है यह हिमालय क्षेत्र मै 6000 फीट से ऊपर वाली ऊंचाई वाले इलाकों में उगता है यह एक शाकीय पौधा है इसमें मार्च माह के मध्य से लेकर अप्रैल माह के मध्य तक बहुत ही सुंदर फूल खिलते हैं इसके फूलों की पंखुड़ियां सफेद रंग की होती है तथा जो इसका मध्य भाग है वह पीले कलर का होता है स्थानीय लोग इसके पत्तियों और कोमल डंठल का सब्जी के रूप में उयोग करते हैं हालांकि इसकी सब्जी बहुत ही ज्यादा कड़वी होती है स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके सेवन से मधुमेह पेट संबंधी रोग एवं बुखार तथा ब्लड प्रेसर कंट्रोल यह सब्जी एंटीअक्सीडेंट के साथ हि अनेक औसधीय गुणों से युक्त है बुजुर्ग लोग इस को अनेक बीमारियों मै प्रयोग करते आरहे हैँ इसे वे बीमारियों का रामबाण दवा मानते हैँ अथार्थ यह पौधा औषधि गुणों से भरपूर है ।एसको जंगल से लाकर काट कर आग मै बड़े पतिले मै उबाल कर पकाया जाता है हालांकि यह सब्जी पकाने के बाद धोने से पहले बहुत कड़वी होती है मगर इसे खूब धोने से कड़वापन दूर हो जाता है इसकी ताजी सब्जी तो बनाई हि जाती है मगर इसको सुखाकर इसका सुखसा बना कर भी रख दिया जाता है ताकि इसे वर्ष भर उपयोग मै लाया जासके जब इसके सुखसे की सब्जी बनाइ जाता है तो इसको गर्म पानी में कुछ देर तक भिगोया जाता है ताकि वह कोमल हो सके और उसकी सब्जी आराम से बनाई जा सके यह स्वास्थ्यवर्धक व ओसधिय गुणों से भरपूर है इसके संरक्षण और इसके संवर्धन की बहुत ही आवश्यकता है।।
कुदरत के खजानेकी खान है
चंद्रा रोगों की दवा रामबाण है

