
15 दिन बाद जंगल से मिला शव, और अब न्याय के लिए सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
एक युवक रोजगार की तलाश में गया था… और पेड़ से लटका शव बनकर लौटा।
29 जून 2025 की दोपहर —
घांघरिया के रास्ते हेमकुंड साहिब की चढ़ाई पर
एक मेहनती, ईमानदार और पहाड़ का बेटा — मनोज सिंह
अपने घोड़े पर यात्रियों को ले जा रहा था।
लेकिन उस दिन… कुछ ऐसा हुआ जो न सिर्फ एक परिवार को तोड़ गया,
बल्कि पूरे नंदानगर घाटी को अंदर तक झकझोर गया।
मनोज और देवेन्द्र चौहान के बीच कहा-सुनी… फिर मनोज लापता
एफआईआर संख्या 0005 (पुलिस स्टेशन गोविन्दघाट, दिनांक 14 जुलाई 2025, समय 17:44) में दर्ज बयान के अनुसार —
मनोज की 29 जून को घांघरिया चौकी में शिकायत दर्ज हुई थी,
जहाँ देवेन्द्र चौहान नामक खच्चर मालिक से उसका झगड़ा हुआ था।
पुलिस ने कहा-सुनी को मामूली कह कर “समझौता” करवा दिया।
लेकिन… अगली सुबह से मनोज गायब हो गया।
15 दिन की खामोशी — एक माँ की चीख बन गई
फोन बजना बंद हुआ,
उत्तर नहीं मिला —
और धीरे-धीरे मनोज की माँ नौमी देवी का इंतजार चीख में बदलने लगा।
परिजनों ने 3-4 दिन तक उसे खोजा।
पुलिस को बार-बार रिपोर्ट दी गई,
लेकिन एफआईआर 10 दिन बाद दर्ज हुई —
सोशल मीडिया और जनदबाव के बाद।
एफआईआर का उल्लेख — देरी, लापरवाही और सवाल
एफआईआर की 6वीं पन्नी में स्पष्ट लिखा है:
29.06.2025 को 11:26 बजे से लेकर 16:45 बजे तक मनोज को देखा गया।
उसके बाद से कोई जानकारी नहीं…
09.07.2025 तक पुलिस गुमशुदगी को गंभीरता से नहीं ले सकी।
अंतिमतः 14.07.2025 को FIR संख्या 0005 दर्ज की गई।”
यह देरी क्यों?
मनोज की शिकायत को पहले ही गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?
और फिर… 15वें दिन — 13 जुलाई को एक मनहूस ख़बर
घांघरिया के जंगल में एक पेड़ से लटका मनोज का शव मिला।
जिस मनोज को उसकी माँ हर दिन याद कर रही थी,
जिस बेटे के इंतजार में बाप (सुरेन्द्र सिंह — सेना से सेवानिवृत्त) हर रात दरवाज़े तक बैठा था…
वो बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
मौत पर उठते सवाल — क्या यह आत्महत्या है या हत्या?
शव पेड़ से लटका मिला — पर…
पैरों में चप्पल नहीं थी,
चेहरे पर मिट्टी और पौधों के टुकड़े चिपके थे,
शव के पास चप्पल बाद में किसने रख दी?
CCTV फुटेज अभी तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुए?
झगड़ा करने वाला देवेन्द्र अब तक कहां है?
एफआईआर में 6 लोगों के नाम दर्ज हैं — जिनमें देवेन्द्र चौहान, गुड्डू, संजय चौहान, अजीत, सलमान और सोनू शामिल हैं।
क्या पुलिस इनसे गंभीर पूछताछ कर रही है?
अब नंदानगर चुप नहीं — जिला मुख्यालय पर आक्रोश फूटा



14 जुलाई को —
नंदानगर की समस्त जनता, जनप्रतिनिधि, बुजुर्ग, महिलाएँ और युवा — सब जिला मुख्यालय गोपेश्वर पहुँचे।
हजारों की भीड़…
“मनोज को न्याय दो”, “हत्यारों को गिरफ्तार करो”, “CBI जांच कराओ” —
हर गली गूंज उठी।
(ऊपर की तस्वीरें इस जनांदोलन की गवाही देती हैं)
पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार और जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद ही आंदोलन स्थगित हुआ।
लेकिन जनता की चेतावनी साफ है —
अगर न्याय में देरी हुई, तो आंदोलन और तेज होगा।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार — पर जनता का विश्वास डगमगा चुका है
पुलिस अधीक्षक ने कहा:
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा कि यह आत्महत्या है या हत्या। यदि हत्या पाई गई तो दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।”
लेकिन जनता पूछ रही है:
क्या ये 15 दिन का इंतजार ज़रूरी था?
क्या पुलिस चौकी में दर्ज की गई पहली शिकायत को गंभीरता से लेते तो मनोज आज ज़िंदा होता?”
मनोज अब नहीं… पर उसकी माँ की पुकार हर पहाड़ी माँ की आवाज़ है
मनोज कोई नेता नहीं था,
वो कोई धनवान नहीं था,
वो तो बस एक सपना लेकर घांघरिया गया था —
इस बार सीजन खत्म होने से पहले एक बाइक खरीदूंगा… माँ को घुमा लाऊंगा…”
अब न बाइक आएगी, न बेटा…
लेकिन उसकी अधूरी कहानी अब हम सबकी ज़िम्मेदारी बन चुकी है।
अब जनता की पाँच माँगें स्पष्ट हैं:
1. CBI या उच्च न्यायिक जांच हो।
2. सभी नामित व्यक्तियों से कठोर पूछताछ और गिरफ्तारी हो।
3. पुलिस की देरी और लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो।
4. पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
5. परिवार को समय-समय पर जानकारी और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता दी जाए।
मनोज चला गया, पर उसकी मौत अब सबकी चेतना बन चुकी है”
आज नंदानगर एकजुट है —
राजनीति से परे, धर्म-जात से परे —
मनोज के इंसाफ़ के लिए।
और अब यही एकता —
प्रशासन को जवाबदेह बनाएगी।
इस लेख को पढ़ें, साझा करें, और आवाज़ बनें — ताकि किसी और मनोज को मरना न पड़े।
