हिन्दी पत्रकारिता दिवस: अतीत की नींव, वर्तमान की चुनौती, भविष्य की दिशा

भारत में हर वर्ष 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1826 में हिन्दी के पहले समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ के […]

नन्दा देवी राजजात यात्रा : सिद्धपीठ कुरुड़ से प्रारंभ होने वाली हिमालयी आस्था की अद्वितीय पदयात्रा। 

उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में एक ऐसी दिव्य, दुर्लभ और दुरूह यात्रा है, जो केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक, […]

बाबा केदार की गोद में उड़ानें और दुर्घटनाएं । आस्था, व्यवसाय और सुरक्षा का टकराव

बाबा,भोले का धाम केदारनाथ, न केवल एक धार्मिक तीर्थ है बल्कि आस्था, आत्मिक चेतना और कठिन तपस्या का प्रतीक भी है। लेकिन इस दिव्यता से […]

बद्रीधाम का समर्पित सिपाही: ऋषि प्रसाद सती की तपस्या से निखरी आस्था की आलोक-गाथा

संघ की शाखा से लेकर श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष बनने तक का सफर किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, परंतु यह चमत्कार किसी […]

भाग 3: अंतर्धान – जब बद्रीनाथ भगवान जी चले तिब्बत की ओर। 

बद्रीनाथ धाम, जहाँ हिमालय की गोद में नारायण स्वयं ध्यानमग्न रहते हैं – एक ऐसा स्थान जहाँ देवता भी तीर्थ करते हैं। लेकिन क्या हो […]

लाटू धाम वाँण: रहस्य, आस्था और मातृभाव की अमिट परंपरा

उत्तराखंड के चमोली जनपद के देवाल विकास खण्ड में स्थित है एक दिव्य और रहस्यमयी स्थल – लाटू धाम वाँण। समुद्र तल से लगभग 2,600 […]

भाग 2: थोलिंग मठ – जहाँ गूंजा बद्रीनाथ का स्वर

तिब्बत की शुष्क और ठंडी वादियों में, कैलास मानसरोवर की पवित्रता से कुछ ही दूरी पर बसा है एक रहस्यमय स्थल – थोलिंग मठ। ऊँचाई […]

भाग 1: थोलिंग मठ और भगवान बद्रीनाथ की अद्भुत यात्रा: एक पौराणिक गाथा। 

हिमालय – यह केवल पर्वत नहीं, बल्कि देवताओं का निवास है। इसके शिखरों पर ऋषियों की साधना गूंजती है, और घाटियों में दैवी कथाएँ बहती […]

कुँवर प्रसून: उत्तराखंड के जनचेतना के अग्रदूत

कुँवर प्रसून न केवल एक प्रखर पत्रकार थे, बल्कि उत्तराखंड के पर्यावरण, समाज और संस्कृति के लिए एक समर्पित योद्धा भी थे। उनकी लेखनी में […]

माँ गंगा: हिमालय की गोद से भागीरथ की पुकार तक ।

जहाँ हिमालय की चुप्पी टूटी, वहीं गंगा ने पहला गीत गाया।  उत्तराखण्ड की देवभूमि में एक ऐसा स्थान है जहाँ धरती ने पहली बार दिव्यता […]